कस्टमाइज फर्नीचर मिलता है यहां

श्री राम फर्नीचर यानी फर्नीचर की दुनिया का एेसा नाम जिसमें इंट्री करने के बाद आप अपने सपनं की दुनिया में पहुंच जाएंगे। वर्ष 1997 में प्लाइवुड ट्रेडिंग से शुरुआत करने वाले पंचकूला श्रीराम ग्लास एंड प्लाइवुड के सीएमडी अशोक गर्ग ने लोगों की डिमांग को भांपते हुए 2011 में फर्नीचर कंपनी लगाई। कंपनी ने फिर बुलंदियों की सीढ़ियां पर चढ़ना शुरू किया। कस्टमराइज्ड फर्नीचर बनाने वाले अशोक गर्ग की कंपनी के फर्नीचर की डिमांड ट्राइसिटी  और विदेशों में भी है।

प्लाइवुड ट्रेडिंग से शुरुआत
कंपनी के एमडी अशोक गर्ग ने बताया कि 1985 में उन्होंने पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-दो में प्लाट खरीदा और 1997 में प्लाइवुड की ट्रेडिंग का काम शुरू किया। करीब पांच लाख रुपये की लागत और दो कर्मचारियों के साथ पहली यूनिट पंचकूला में लगाई। इस दौरान अशोक गर्ग पंजाब प्लानिंग बोर्ड में बतौर रिसर्च ऑफिसर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में लोगों की डिमांड पर वे रेडिमेट पीओपी सीलिंग कॉन्सेप्ट लेकर आए और दूसरी यूनिट भी पंचकूला में पहली यूनिट के सामने लगा डाली।

जॉब छोड़ा और शुरु की फर्नीचर इंडस्ट्री

वर्ष 2011 में कंपनी में मैन पॉवर की ज्यादा जरूरत के मद्देनजर अशोक गर्ग ने सरकारी नौकरी छोड़कर पूरा ध्यान बिजनेस पर ही लगा दिया और इसी वर्ष में ही लोगों की मांग को भांपते हुए उन्होंने फर्नीचर बनाने का काम शुरू कर दिया। इससे पहले उनके छोटे भाई राकेश गर्ग ने भी 1997 में हरियाणा आर्किटेक्चर विभाग में नौकरी छोड़कर अपने बड़े भाई के साथ प्लाइवुड की ट्रेडिंग में काम शुरू कर चुके थे।

विदेशों में भी है इनके फर्नीचर की डिमांड
पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली में अपने बेहतर क्वालिटी के फर्नीचर से धाक जमा चुके अशोक गर्ग के फर्नीचर की डिमांड विदेशों तक पहुंच चुकी है। अशोक गर्ग ने बताया कि अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में उनकी कंपनी में तैयार किया जा रहा फर्नीचर सप्लाई हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में कनाडा से उन्हें बतौर विदेशी फर्नीचर का पहला ऑर्डर मिला।

बेहतर तालमेल से बढ़ रहा बिजनेस
अशोक गर्ग ने बताया कि उनके पिता देसराज छोटे भाई राकेश के सहयोग से कंपनी का बिजनेस न केवल अच्छा चल रहा है बल्कि बढ़ भी रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में पंजाब सरकार से रिटायर्ड हुए पिता वर्ष 1998 से ही कंपनी के कारोबार को पूरी निष्ठा से देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट कॉरसपोंडेंस, बैंकिंग और कंपनी बिलिंग का काम उनके पिता ही देखते हैं। इसके अलावा उनके छोटे भाई मार्केटिंग का सारा काम देख रहे हैं। वहीं खुद अशोक गर्ग फाइनेंस कंट्रोल और ऑफिशियल मैनेजमेंट का काम देखते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग
– ऑल डोमैस्टिक फर्नीचर
– होटल के लिए फर्नीचर
– ऑफिसर के लिए फर्नीचर
– ऑल इंटीरियर जॉब्स-
फ्लोरिंग, सीलिंग, फर्नीचर, मैनेस वर्क

अशोक गर्ग, सीएमडी
स्कूलिंग- गवर्नमेंट मॉडल स्कूल, सेक्टर-22 चंडीगढ़ (1979)
ग्रेजुएशन- गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर-11 चंडीगढ़ (1983)
सदस्य- इंडस्ट्री एसोसिएशन, पंचकूला।

राकेश गर्ग, एमडी
स्कूलिंग- गवर्नमेंट मॉडल स्कूल, सेक्टर-37, चंडीगढ़ (1989)
डिग्री- आर्किटेक्चर, चंडीगढ़ आर्किटेक्चर कॉलेज, चंडीगढ़ (1993)

टिप्स
– हर काम को लगन और विश्वास से करें
– इंडस्ट्री लगाने से पहले ही सर्वे कर लें
– इंडस्ट्री लगाने के पहले वित्तीय विकल्प देखें
– इंडस्ट्री का ज्ञान और कर्मचारियों से तालमेल रखें
– प्रोडक्ट की क्वालिटी को मेंटेन करना जरूरी

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