चीन को पछाड़ा पंचकूला की फर्नीचर इंडस्ट्री ने

पंचकूला की फर्नीचर इंडस्ट्री का कमाल है कि एक समय बाजार पर कब्जा जमा चुका चीन अब मैदान छोड़कर भाग खड़ा हुआ है। अब मार्केट में चीन का शेयर सिर्फ बीस फीसदी ही रह गया है। मार्टिंस, ओसवाल, फोनिक्स जैसे बड़े नाम पंचकूला की देन है मगर माइक्रो, स्माल और मीडियम इकाइयां भी कुशलता से डटी हैं।

दस हजार को रोजगार
पंचकूला की फर्नीचर इंडस्ट्री ने करीब दस हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया है।  एक्सपर्ट बताते हैं कि इंडस्ट्री में ज्यादा रोजगार है पर स्किल्ड लेबर की कमी होने कारण रोजगार कम मिलता है। इसके लिए आईटीआई जैसे  संस्थान से स्किल्ड वर्कर तैयार किए जाएं और उनकी ट्रेनिंग इंडस्ट्री में करवाई जाए। जिससे इंडस्ट्रियलिस्ट और संस्थान के बीच गैप कम हो और इंडस्ट्री को उनके मुताबिक लेबर मिल सके।

आंकड़ों में इंडस्ट्री
60 इकाइयां
1000 करोड़ कुल टर्नओवर

फर्नीचर  इंडस्ट्री के लिए फाइनेंस और बिजली चुनौतियां हैं। इंडस्ट्री के लिए फाइनेंस उपलब्ध करवाएं तो इंडस्ट्री बेहतर हो जाएगी। पिछले एक दशक में इस इंडस्ट्री ने फर्नीचर  को एक नया मुकाम दिया है।
– कृष्ण गोपाल गुलाटी, मार्टिन फर्नीचर

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