अपनी ड्रीम कार में बदल डाली फोर्ड आइकॉन

आपकी कोई कार अगर बेकार खड़ी हो तो उसको शायद आप नई कार खरीदने और पुरानी कार को बेचने की प्लानिंग करने लगेंगे। मार्टिंस के एमडी एलबी गुलाटी के साथ एेसा नहीं है। जनाब का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है और इसी दिमाग की उपज है उनकी ड्रीम कार। यह ड्रीम कार एलबी गुलाटी ने अपने घर में खड़ी फोर्ड आइकॉन को काटकर तैयार कर डाली। दिलचस्प बात यह है कि यह एकदम विशुद्ध खुद तैयार की गई कार है। आप कार का स्ट्रक्चर देखेंगे तो उसमें आपको कुछ कुछ फेरारी की झलक दिखेगी। यह अलग बात है कि इसकी चेसिस फोर्ड आइकन की है.. लाइट्स वाक्सवैगन व हुंडई की और स्टेयरिंग आई-१० का। उनकी तैयार की गई इस सुर्ख लाल रंग की कार को जो देखता है एकटक देखता ही रह जाता है।
पद्मश्री नेकचंद के शहर चंडीगढ़ में ऐसे कई हुनरमंद हैं, जिनको बेकार हो चुके आइटम का उपयोग खूब आता है। पंचकूला में मार्टिंस के एमडी एलबी गुलाटी भी एेसे ही हैं। उनके भाई और मार्टिंस के एमडी कृष्ण गोपाल गुलाटी भी अपने भाई के हरेक आइडिया को खास तवज्जो देते हैं। एलबी गुलाटी ने बताया कि इस कार को उन्होंने अपनी टीम के साथ तीन माह के अथक प्रयास के बाद तैयार किया। कार की स्केचिंग, स्केलिंग और नई डिजाइन को पहले उन्होंने अपने लैपटॉप पर तैयार किया और उसके बाद पुरानी कार को काटना शुरू किया।
लाइटें हुंडई और वाक्सवैगन की
एलबी गुलाटी ने बताया कि उन्होंने कार की फ्रंट लाइट वॉक्सवैगन की और बैक लाइट आई 20 की लगाईं है। इसके साथ ही स्टेयरिंग को चेंज करके आई-10 का लगा दिया गया। मॉडिफाइड कार में साइड मिरर को मोटराइज्ड कर दिया गया। इसके साथ ही बैक सेंसर और बैक कैमरा लगाया गया। मॉडिफाइड कार में स्टीरियो ऐसा लगाया गया, जिसमें जीपीएस कनेक्टिविटी भी है।
स्केचिंग से तैयार हुआ डिजाइन
एलबी गुलाटी ने बताया कि फोडज़् आइकन को काटने के पहले उसकी स्केलिंग की गई। वास्तव में वह फोडज़्  के हरेक पाटज़् का सदुपयोग करना चाहते थे। इसमें यह भी ध्यान रखा कि कहीं नई कार में कोई ऐसा पाटज़् न लगा दिया जाए जो कि बाद में बाजार में उपलब्ध न हो। इसके लिए स्केलिंग की गई और उसके बाद कार को काटा गया। फोडज़् आइकन फोर सीटर थी और नई कार में वह दो सीट ही लगाना चाहते थे इसके लिए जरूरी था कि कार का दरवाजा बड़ा किया जाए। फोडज़् आइकन को काटा गया तो उसके बाद उसके दरवाजों को मोल्ड करके एक दरवाजा तैयार किया गया। फोडज़् की मूल चेसिस को वही रखा गया।
क्ले से तैयार किया गया माडल
एलबी गुलाटी ने बताया कि कार को नया लुक देने के लिए क्ले की आवश्यकता थी। इसके लिए साढ़े तीन क्विंटल क्ले मंगाई गई। इसके बाद कार का मॉडल क्ले के माध्यम से तैयार किया गया

कार का क्ले माडल

। उसके बाद उसी क्ले पर कार के डैशबोडज़् को तैयार किया गया। इसके बाद फायल पेपर लगाया गया और उसके ऊपर लोहे का इस्तेमाल किया गया। फिर कार को शाइनिंग लुक देने के लिए उसमें फाइबर का इस्तेमाल किया गया।

तीन महीने तक किया काम
एलबी गुलाटी ने बताया कि फोडज़् आइकन को नया लुक देने के लिए उन्होंने पहले पूरी रिसचज़् की। इसके लिए यू ट्यूब पर वीडियो देखीं, कई किताबों को पढ़ा और उसके बाद इसका काम शुरू किया। तीन माह में लुक चेंज करना इसलिए संभव हो सका, क्योंकि उसके लिए होमवकज़् काफी समय पहले ही कर लिया गया था।
इसलिए किया गया लुक चेंज
एलबी गुलाटी ने बताया कि 2009 माडल फोडज़् आइकन कार उनके घर में काफी समय से खड़ी थी। जब कार नई थी तो हरेक उसको चलाना चाहता था, लेकिन अब कार को कोई नहीं ले जाता था। इसलिए उनको यह विचार आया कि क्यों न कार को एकदम नया लुक दे दिया जाए।
पहले बच्चों के लिए तैयार की बाइक
कृष्ण गोपाल गुलाटी ने बताया कि इस कार के पहले उनके भाई एलबी गुलाटी ने बच्चों के लिए बाइक तैयार की और उसके साथ ही दो स्कूटी के इंजन के साथ छोटी कारें तैयार की, जिसे बच्चों ने खूब एंज्वाय किया। उन्होंने कहा कि एलबी गुलाटी काफी प्रयोगवादी हैं।

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