बस चलते गए और कारवां बनता गया

मेरे पिता पिछले तीस साल से नही मिले। मैने और मेरी माँ ने भी के साथ मिलकर उनको बहुत ढूंढने की कोशिश की पर सफलता हाथ नही लगी। ये हैं सब्बरवाल रियल्टी ग्रुप के डायरेक्टर दीपक सब्बरवाल। दीपक सब्बरवाल का ये सफर इतना साधारण नही रह। बचपन से लेकर जवानी तक बाधाएं आयीं लेकिन बाधाओं का सामना करके उन्होंने अपना एक मुकाम बना लिया।

एक समय परिवार पर ऐसा आया कि हम सभी को घर चलाना मुश्किल हो गया था। लेकिन मां ने कभी हार नहीं मानी और हमको भी सिखाया की हार नही माननी है। मैं जीरकपुर में रहता था। उस समय मैने कई काम किये। पढ़ाई भी करता रहा। मुझे एक सहारा मिला वो था एनके शर्मा का। उनकी कंपनी में मैने करीब 18 वर्ष काम किया। उसके बाद भाई विशाल सब्बरवाल के साथ बिज़नेस में आ गया। सब्बरवाल रियल्टी ग्रुप बना और अब ये ग्रुप रियल्टी सेक्टर में काफी तेजी के साथ काम कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *